Saturday, November 20, 2010

आंसू

आज वो आँखों में
जाने कहा से आ गया
पल-पल बदलती दुनिया को
कुछ पल के लिए धुंधला गया

जो कपोलो पे लुढका वो
लगा दृष्टि कुछ साफ़ हुयी
गौर से जो देखा
तो बीते कल से बात हुई

बात बड़ी पुरानी थी
बस राजा था और रानी थी
आवेग, उद्वेग, भय, अविश्वास नहीं
बस परियो की कहानी थी

याद जो आई बचपन की
फिर से आंसू आ गया
कहाँ छूट गया वो सब
और क्यों ये अँधेरा छा गया

फिर सोचता हूँ की उन कोमल यादों को
क्यों आज की कठोरता से जोडू
क्यों उन पलों की सुन्दरता को
निर्ममता से मैं छीन लूँ

आज आज है कल कल था

तो फिर क्यों आज का ये ज़हर
बीते कल के सुनहरे प्याले में पीलूं

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